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नज़रे सुखी पड़ी

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नज़रे सुखी पड़ी, अश्क कैसे बहे,
हाल ए दिल भला, अब किससे कहे।

यार जो थे, नई महफिल में रमे,
कारवां एक छूटा, कारवें बनते गए।

वक्त क्या बदला, जुदा हो चल दिए,
पल में चमन, यूं उजड़ते गए।

और वो, बस सोचती सी रह गई,
जहां से चली, वही थी वो खड़ी मिली।

देव

31/08/2020, 9:19 pm

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