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तुलना तुम्हारी किसी से नहीं है॥

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तेरे लबों से निकलने वाले,
है उस अनमोल लब्ज़ को,
जैसे बचपन में किताब के,
पन्नो के बीच, पत्ती रख लेते थे ना,
बस वैसे ही,
सम्हाल कर रख लेती,
और पड़ती बार बार, हर बार,
जब कभी भी जिन्दगी के
सफर में कहीं, भटकती,
और तुम्हारी बात याद करती,
“कमीनी, तुम सबसे अच्छी हो”
किताबों का तो नहीं, हाँ
मगर यादों का पुलंदा ज़रूर है,
और खुल जाता है अक्सर,
यहां वहां, कभी अकेले में,
कभी यारो की महफिल में,
और फिर सोचती हूं, कि,
काश तुम सामने होती।

तेरा वो ऑफिस के गलियारों,
से गुजरना, और तेरी जुल्फों का,
कांधे पर तेरे लटकना,
अधखुली आंखो से तेरा,
हल्के से मुस्कुराते हुए,
हर तरफ देखना,
और तेरी मटकती सी कमर पर,
हर मर्द की निगाहें गिरना,
तेज कदमों में, छोटे छोटे कदम
लेते हुए, तेरा मेरे सामने से गुजरना,
काश वक़्त रुक जाता,
और खुदा मुझको, लड़का बनाता,
मोहब्बत है तुझसे, मैं,
पल में बोल जाती,
तेरे आगोश में, जिन्दगी
अपनी बिताती।

मुस्कुराती से, अब भी तुम
काम हूर नहीं हो,
कमसिन सी काया में,
तुलना तुम्हारी किसी से नहीं है,
अब वक्त भी है,
और दिल भी जवां है,
सबको मिलती है, यूं
जिन्दगी कहां है,
चल पड़ो, कुछ करो,
अब वक्त तुम्हारा है,
बहुत से दिल अब भी है,
जिनमे नाम तुम्हारा है,
थाम लो, थाम लो हाथ,
हाथो में अपना, अभी देर हुई नहीं,
इश्क है, तो है, इसमें
उम्र की परहेज नहीं।

देव

29/09/2020, 9:46 am

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