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ले मुस्कान चेहरे पर,
वो झाड़ू लगा रही है,
बड़े इत्मीनान से,
काम किए जा रही है,
शिकन कहाँ है,
और रखे कहाँ वो,
कम है कुछ, या नहीं
अभी नहीं परवाह,
शुक्र खुदा का, दिल से
किए जा रही है
बड़े इत्मीनान से,
काम किए जा रही है,
भोर होने से पहले,
भोर को लाती है,
चूल्हा चौका, घर का,
वो निबटाती है,
अब वो घर औरो के,
चमका रही है,
बड़े इत्मीनान से,
काम किए जा रही है।
सपने हजार कभी
उसने भी देखे होंगे,
कुछ हुए सच,
बहुत बाकी होंगे,
ख्वाबों का घड़ा, बूंद बूंद
भरे जा रही है।
बड़े इत्मीनान से,
काम किए जा रही है।
देव
09/11/2020, 12:39 pm
