Site icon DevKeDilSe

अश्क उसके, बहते रहे!

Advertisements

अश्क उसके, बहते रहे, और बस बहते रहे,
मैं तकता रहा, और भीगे नैन उसके कहते रहे।

ना जाने कितनी बातें, कह गई पल में,
सुना कुछ ना था और हर बात समझते गए।

दर्द उसका, समझ तो सकता हूं, बयां करूं कैसे,
जुबां कुछ कहती रही, और वो कुछ समझते रहे।

वक्त ही कुछ यूं है के, मुश्किल है मिलना उनसे,
वो उधर रोते रहे, और हम इधर बैठे रहे।

देव

27/11/2020, 10:10 pm

Exit mobile version