Site icon DevKeDilSe

बस, तुम यहीं हो।।

Advertisements

बस, तुम यहीं हो।।

आज भी, उसी तरह से,
सजा कर रखा है,
उस कमरे को,
जैसा, तुम छोड़ गई थी,
कुछ पल ही रही थी,
मगर तुम रही थी।

उन्हीं पलों की यादों को,
सजो के रखा है,
यू ही नहीं,
दीवारों पर, ये रंग लगा है,
हाँ, वही जहा तुमने,
अपना हाथ रखा था,
गीली मेहंदी के लगने पर,
सॉरी कहा था।

अभी भी सलवटे, वैसी ही है
उस लिहाफ की,
जिसे ओडा था तुमने,
जब सर्द शाम थी,
अभी भी आती है खुशबू,
तकिए से तेरी,
महकती है तेरे बालो की खुशबू से,
वो दराज मेरी।

रखी है प्याली चाय की,
सम्हाल कर आज भी,
तेरे लबों के रंग से,
रंगी थी जो कभी,
अक्सर, कुछ घूंट,
उससे पी लेता हूंँ,
तेरे स्पर्श को,
महसूस कर लेता हूंँ।

और वही, सोफे पर,
जहाँ तुम बैठी थी कभी,
जब भी तन्हा होता हूंँ,
गुजरता है वक्त वही,
बस, तुम यहीं हो,
यहीं तो कहीं हो, बस
इसी सोच में, पल पल
गुजरती है जिन्दगी।।

देव

30/12/2020, 2:04 am

Exit mobile version