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कुछ किस्से, मुलाकाते १

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Now, it’s a try to write for special people of my life… One of my best friend…

बस, कुछ साल हुए है
जब मिला था पहली बार उससे
नहीं, किसी डेट पे नहीं
वहीं, उसके ऑफिस में
जो उस दिन से मेरा भी होने वाला था
लेकिन ना के बरोबर
कुछ, अच्छा सा लगा था
अपनापन सा, जो कभी लगता है
बहुत ही कम बार
पहली मुलाकात में ही
महसूस होता है
की जानते है आर्सो से

बस, वहीं एक मुलाकात
फिर महीनों का अंतराल
और फिर सालो का
करी होंगी मुश्किल से चंद मुलाकाते
साल भी बहुत ज्यादा है
अगर गिनने बैठेंगे मुलाकाते

लेकिन, जब भी मिला
कुछ खास लगा
चाहे वो कुछ पल साथ में
एक कप काफी पीना ही था

हां, एक बार, उसने गले जरूर लगाया था
कुछ और ना समझो यारो
एक दोस्त की तरह
उसने गले जरूर लगाया था
अब भी याद है, अच्छी तरह
वैसे मैं ये हिमाकत करता नहीं था
पर वजह आज तक अनजान है
जाने क्यूं, जब वो जाने लगी
मैंने पीछे से आवाज दी
और कहा, एक झप्पी तो दे दे
और, उसने भी, हल्की सी होठो पे
मुस्कुराहट साथ वापस आकर
एक जादू की झप्पी दे डाली

बस, फिर गायब, सालो
पर अब, फिर से मिली
इस बार, वो कुछ अलग नजर आई
जैसे, बताना चाहती थी
कुछ दिल की बाते
कुछ दर्द, कुछ घूटी राते
तन्हाइयो में बिताए पल
लेकिन, ना जाने क्यूं
बताया नहीं
खुद को बुलंद दिखती है
लेकिन कहीं दिल के एक कोने में
कई राज छुपाती है

कोई शक नहीं
वो भी अकेली मां है
बच्चो को निडर बनाना है

अब तो अक्सर मुलाकात होती है
अरे, फिर वही, एक अच्छे दोस्त की तरह
लेकिन, में भी कुछ नहीं पूछता हूं
बस, उसके साथ खड़ा रहता हूं

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