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आज फिर, तेरी तस्वीर मैंने निकाली
अपनी यादों के एल्बम से
वहीं जब थी तू मुस्कुरा रही थी
अपने सितारे के शुभ दिन पे
यकीन नहीं होता, नहीं होगी
तू सामने मेरे फिर यूं ही
पर महसूस कर रहा था तुझे आसपास
जब मना रहे थे जश्न तेरी परछाई का
देख, कहीं कुछ कमी तो नहीं
रखी मैंने, परवरिश में उसकी
तू नहीं, अब मैं ही कर रहा हूं
कमी पूरी तेरे ख्वाबों की
बस, एक बार, देख ले कर
अब भी बस तेरी चाहत है
खोलता हूं दरवाजा, हर आहट पे
लगता है, जैसे तेरी दस्तक है
देव
