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इश्क़ करने की खता
करी थी हमने भी इक बार
माना, मिली बेवफाई
हमे भी इक बार
तो क्या, इश्क़ का क्या कसूर
जब है हुज़ूर मगरूर
रास्ते बदल कर हम फिर चलेंगे
शीशा नहीं हम,
जो टूट जाए, तो फिर नहीं जुड़ेंगे
एक बार फिर से मिले नज़रे
फिर से हो दीदार यार का
एक बार फिर से धड़केगा दिल
एक बार फिर करेंगे प्यार
देव
