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तसल्ली देते रहे, दिल ए नादान को,
उनकी झलक एक मिल जाए
कभी कद्रदान को
ख्वाबों में हजार, चेहरे बना डाले
इंतजार में उसने
कभी तो होगा, मिलना जान का
उसकी जान से
अब से सांसें भी थम ना रही
डगमगा रहे है कदम
जब से थामा है हाथ उसने
अपने ख्वाबों के राजकुमार का
देव
