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पर्यावरण बचाओ, दीवाली पर पटाखे ना चलाओ

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पर्यावरण बचाओ, दीवाली पर पटाखे ना चलाओ,
पर्यावरण बचाओ, दीवाली पर पटाखे ना चलाओ,

हर साल, इस तरह की, आवाजे
बस इसी महीने आती है,
पता नहीं, यूं जोकरो की,
इस महीने अप्रेजल की बारी आती है,

सोते रहते है, ये जब,
नया साल आता है,
तब क्या, पर्यावरण छुट्टी पर चला जाता है,
दुनिया के हर देश में, पटाखे चलाए जाते है,
और ये जोकर, क्रिसमस की
छुट्टियों में मगन हो जाते है,

और, क्यों ये सोते रहते है,
जब जानवरों को काटा जाता है,
त्योहार के नाम पर,
लहू बहाया जाता है,
बिना युद्ध, बिना नफरत के,
कितनी बली चढ़ जाती है,
तश्तरी में परोस कर,
पर्यावरण की दुहाई दी जाती है,

चलो, पूछते है इन जोकरों से ही,
कुछ प्रश्न आज मिलकर,
क्यूं चलते है कार, स्कूटर
क्या, मिलती है इनसे,
पर्यावरण को ताकत,
क्या इनके घरों में,
कुछ नहीं प्लास्टिक का है,
क्या इनमें से कोई भी,
सिगरेट नहीं फूंकता है,
क्या ये कागजों पर छाप,
इस्तिहर, नहीं काटते पेड़ो को,
क्या नहीं लगते क्रिसमस ट्री,
जब आता है क्रिसमस,

जितना वक़्त, य नारो में लगते है,
उससे आधे वक़्त भी क्या,
ये पेड़ो को पानी पिलाते है,
क्या, ये शावर में कभी नहीं नहाते है,
या, बोतल बंद पानी छोड़,
प्याऊ में ओक लगते है,

प्रण लेता हूं, नहीं चलाऊंगा,
रत्तिं भर पटाखा मैं,
मुश्किल है, पर छोड़ दूंगा,
जानवरों को खाना मैं,
पर, बस, एक जोकर,
ऐसा मिल जाए,
जो जोकर ना कहलाए,
जो पर्यावरण की सच में सोचे,
हर हरकत में, हरियाली सोचे।।

देव

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