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हंसी तेरी, तेरा श्रृंगार बन गई

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बंद आंखो में देख, सपने
बिना, जेवर के, तू लगी सजने,
लाली होठों की, तेरी मुस्कान बन गई,
हंसी तेरी, तेरा श्रृंगार बन गई,

ख्याल आया तो होगा, तुझे उसका जरूर,
जिसकी यादों से, खुशनुमा ये शाम हो गई,

तेरे हाथों में कुछ, कंपकपी सी क्यूं है,
तू तेरे लबों पर, ये नमी सी क्यूं है,।
होठ लड़खड़ाते है आज, बोलने से पहले,
तेरी महफ़िल में, उसके आने की बात हो गई।

देव

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