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उलझे उलझे में कितने सुलझे है,
अड़चने हजार, और प्यार ने ढूबे है,
नाम नहीं रिश्ते का कोई,
पर जग सारा, इनको पूजे है,
राधे बोल कृष्ण से पहले,
प्रेम रंग में, जग में है फैले,
प्रेम की क्या परिभाषा बन बोले,
बिन पाए, एक दूजे के हो ले।।
देव
