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ये कैसा इत्तेफ़ाक़ है

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ये कैसा इत्तेफ़ाक़ है,
आज ही कभी,
की थी शुरू,
जिंदगानी नई,
आज ही, लगता है,
हो रही है शुरू,
कहानी नई,
बस, वक़्त के साथ,
अंदाज बदल गया है,

ना कोई नाम, ना इशारा
पर, किसी ने, जोर से पुकारा,
बस ढूंढ़ती सी रह गई,
और रात, यूं ही निकल गई,

समझ तब कुछ ना आया था,
आज, कुछ ना समझ आया,
आंगन में रखे, मरतबान से,
जैसे, फिर वही,
पुरानी खुशबू का,
उड़ता हुआ सौंधा आया।

देव

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