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मगर तुम साथ होती,तो कुछ और बात होती

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सफ़र तो यू भी, कट जाएगा,
तुम्हारी यादों के सहारे,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

महफ़िल थी, मगर तनहाई भी थी,
लोग थे बहुत, कोई हमसफ़र ना था,
अब मैं हूं और तेरी यांदे है,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

वक़्त भी है अब, और मौसम भी,
शराब है और जाम भी,
पी रहा हूं, नाम तेरा लेकर,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

सफ़र तो यू भी, कt जाएगा,
तुम्हारी यादों के सहारे,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

देव

30 जून 2020

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