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जो मेरे जेहन में तू है,
वो तुझसे कहीं बेहतर है,
मिलना होता है मेरा,
उससे अक्सर है,
छू तो उसे भी नहीं पाता,
ना कभी कोशिश ही करी,
हां, जी भर देखा उसको,
जब भी इच्छा करी।
हां, वो तुझसे कुछ,
ज्यादा शर्मीली है,
मगर मोहब्बत है तुमसे,
बिंदास ये बात कही है।
वो, चुप रहती है अक्सर
और बता बहुत देती है,
कितने ही दिन, रातें
मैंने उससे बातें की है।
जहा रहो, तुम खुश रहो,
दुआ मैंने खुदा से की है,
जेहन में मेरे, तुमने जगह
अपनी मुकर्रर की है।।
देव
02/09/2020, 10:59 am
