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जिंदगी दौड़ लगती है मुझसे,

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जब भी जिंदगी दौड़ लगती है मुझसे,
थोड़ा रुक जाता हूं,
कुछ पल ठहर जाता हूं।

पाने को तो, बहुत कुछ है, जहां में मगर,
जो मिला है, पहले खुदा को,
उसका शुक्र अदा फरमाता हूं।

कहां गैरों की बात, करने का वक़्त है यहां,
अपनों के हिसाब निबटाने ने में ही,
वक़्त कितना निकाल देता हूं।

तेरे मयखाने की, उस दो बूंद शराब,
कि खातिर, तेरी महफ़िल में,
शांमे अपनी गुज़ार देता हूं।

मोहब्बत है मुझसे तुझे, कह दे
इक बार जरा, इंतेज़ार में तेरे,
कई उम्र गुज़ार सकता हूं।

देव

17/08/2020, 1:42 pm

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