क्यूं तेरे नाम को, ढूंढता हूं,

क्यूं तेरे नाम को, ढूंढता हूं,पल दो पल में अक्सर, क्यूं याद तेरी, आती है,मेरे जेहन में अक्सर, क्यूं पूछता हूं हाल तेरा,लोगो से अक्सर, क्यूं, देखता तस्वीर तेरी,दिन में कई बार अक्सर, क्यूं खोजता हूं, तेरा चेहरा,हर चेहरे में अक्सर, क्यूं रहता हूं, बेकरार तुझसे,मिलने को अक्सर।। देव

वो प्यार नहीं तो क्या है।।

तेरे हाथो को थाम, कुछ पल बैठा था,सबसे सुकून भरे थे वो लम्हे। कुछ अश्क तेरी आंखो से भी बहे थे,बता दे, वो प्यार नहीं तो क्या था। तेरा बातों को, गहराई से बोलना,और मेरा तुझे, एक टक सुनना, तेरी आवाज़ में खो जाना, तेरा मुस्कुरानाबता दे, वो प्यार नहीं तो क्या है।। Dev

ना करो वक़्त जाया

मौत जिंदगी से बेहतर है,या जिंदगी मौत से,बेसिरपैर की बातो में,ना करो वक़्त जाया, मिला है जो, अपनालो,बेझिझक, जो आज है,वही है तेरे पास, कलक्यूं ना छोड़ दे, कल पर।। देव

यूं ही लोग, इश्क़ को छिपाए फिरते है।।

दर्द कहा किसी को, अच्छा लगता है,यूं ही लोग, खुशमिजाजी पर, कसीदे कसते है। हमे तो तन्हाई, नागवार लगती है,यूं ही लोग, तन्हाई से मोहब्बत करते है इश्क़ है तो जताने में क्या हर्ज है,यूं ही लोग, इश्क़ को छिपाए फिरते है।। देव

यकीं कर, एक दिन, मुझे ही पाएगी

तेरी महफ़िल में, जो खाली है, एक जगह,यकीं कर, एक दिन, मुझे ही पाएगी। माना, बाहें बहुत मिल जाएंगी, तुझे,चैन की नींद, मेरे आगोश में ही आएगी। अश्क तेरे, यू ही ना, बहा रोने में,काम आएंगे, जब, तू खिलखिलाएगी। डर मत, कदम आगे तो बड़ा, क़दमों में,तेरे हथेलियां मेरी, बिछ जाएंगी। देव

बेसब्र सी जिंदगी, और तेरा साथ

बेसब्र सी जिंदगी, और तेरा साथ,कुछ पल ही सही, जीया तो सही। बेमानी सा वक़्त, और तेरे कुछ पल,कुछ और ना मिले, कोई गिला नहीं। ख्यालों के भंवर में, तेरी एक याद,भुला दू सब कुछ, कोई शिकवा नहीं।। देव

तू अभ्र है, मैं सब्र हूं

तू अभ्र है, मैं सब्र हूं,तू जिंदगी, मैं ख्याल हूं।तू रूह है, मैं नाम हूं,तू शराब है, मैं जाम हूं। तू नहीं तो, मैं किस काम का,मैं नहीं तो, तेरा नाम क्या,मिल जाए गर, दोनों कभी,मिसाल देगा, ये जहां।। देव

रोज करेंगे, सब संग मिलकर, प्राणायाम

नमस्कार, जोड़े दोनों हाथो को, करे प्रणाम,अब इसमें भी है क्या ज्ञान, साधारण सा आसान, मगर गूढ़ है विज्ञान,करता है शरीर में, ऊर्जा का संचार, किसने जाना था, बस संसो की लय से,बना सकती है, ये दुर्ग अभेद, अब विज्ञान भी मानता है वैज्ञानिक भी,योग से बढ़कर नहीं है कोई, इलाज अभेद, चलो करते है … Continue reading रोज करेंगे, सब संग मिलकर, प्राणायाम

तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी।

फांसले दरमियान, अब रहे ना कहीं,तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी। उम्र काफी, गुज़र गई, और बची, है अभी,चाहत इस दिल में, कुछ कम, ना हुई,तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी। इश्क़ था, हुआ कभी, दिल ये भरता नहीं,ये दिल, है फिदा, तुम पर, जोहराजबी,तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी। फांसले दरमियान, … Continue reading तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी।

लगता है उसके आज, जुल्फे अपनी खोली है।

मौसम तो गर्मी का है, पर ये सर्द हवाएं कैसी है,लगता है उसके आज, जुल्फे अपनी खोली है। चांद को ढूंढा आसमां में, आंख मिचौली खेली है,उसके नूर से मेरे जहां में, रोशनी कैसी फैली है। ना फूल है यहां, ना बगिया, कैसे खुशबू ये फैली है,उसकी सौंधी सोंधी सुगंध से, मेरी बगिया महकी है। … Continue reading लगता है उसके आज, जुल्फे अपनी खोली है।

ये दोस्ती, ही तो है, जिंदा हूं मैं यहां

तुम हो तो मैं हूं, वरना मैं, मैं कहा,तुम है तो मै हूं, वरना, दो पल का मेहमा। ये दोस्ती, ही तो है, जिंदा हूं मैं यहां,नहीं दोस्ती, तो तू कहां, मैं कहां। मुझको मैं बना कर, कहीं चल ना देना तू,तू नहीं, तो जहां में, मेरा है क्या।। देव

यार छूट गए जो पीछे,कुछ ना बाकी, रह जाएगा

कभी रातें भी, इतनी स्याह होंगी,सोचा ना था,अक्स भी साथ ना छोड़ जाएगा। तब भी होगा, तो बस यार साथ,पकड़ कर हाथ,तुझे सुबह तक ले जाएगा। जरा, सम्हाल कर चल ए जिंदगी,यार छूट गए जो पीछे,कुछ ना बाकी, रह जाएगा। देव

है पिता, तुम्हे शत शत नमन करता हूं।।

Who loves their dad pls read it, and if not, still pls read it, my contribution to all father or mothers playing role of father as well…. कब का बड़ा हो गया मै,और वक़्त तुझे जरा ना मिला,अक्सर, कौनसी क्लास में आगाया,तुम्हारे मुंह से ये प्रश्न निकला, ये शिकायत रही, मगर जानता हूं तुझे,ताउम्र, तू … Continue reading है पिता, तुम्हे शत शत नमन करता हूं।।

पर्यावरण का हर कण खुश है।

ये क्या महामारी आईं है,क्या सच में महामारी आईं है,या धरा को बचाने, भगवान ने,कोई नई चाल चलाई है, क्यूं फिर से आकाश, नीला है,क्यूं नदियों का जल, निर्मल सा है,क्यूं, जंगल फिर से हरे भरे,क्यूं, मौसम बदला बदला सा है, क्यूं, कलरव करते पक्षी फिर से,क्यूं, बादल आ गए, बिन मौसम के,क्यूं, क्रीड़ा करते, … Continue reading पर्यावरण का हर कण खुश है।

ये मां कहलाती है।।

सम्हाल कर, पतेली में, चम्मच चलाती है,एक एक ग्रास, नन्हों की थाली में डालती है,कहीं भूखे ना रह जाए, बड़े प्यार से खिलाती है,और खुद, बचे कणों में मिला पानी जरा,पीकर सी जाती है, ये मां कहलाती है। ना जाने कितनी रातें, गीले में खुद सोकर,सूखे में सुलाया हमे, खुद जाग कर,राते काली, लोरी गा, … Continue reading ये मां कहलाती है।।

फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।।

कहते है सब, तू बसा है हर कण में,फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में। प्रथ्वी तेरी, अम्बर तेरा, तेरी ही सब माया,सांसे तेरी, जीवन तेरा, तेरी आंखो काया,फिर क्यूं ढूंढे इंसा तुझको, जल थल में। तुझमें मैं हूं, मुझमें तू है, तू ही मै, मैं ही तू है,बसा है तू, इस जग के, हर … Continue reading फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।।

स्त्री बस स्त्री नहीं, अर्धांगिनी है

भारतीय संस्कृति में कभी भी पर्दा प्रथा नहीं थी। बल्कि स्त्री को अर्धांगिनी माना गया है। प्रथम गुरु मां, एक स्त्री होती है। बेटियां देवी के रूप में पूजी जाती है। पत्नी का स्थान, पति के साथ होता है। फिर पर्दा क्यूं।।। कुछ पेश है।। बेगैरत कहने वालो, जरा नज़रे घुमा लो,पर्दा क्यूं मै करू, … Continue reading स्त्री बस स्त्री नहीं, अर्धांगिनी है

मुझसे ना करो इश्क़, पछताओगे

मुझसे ना करो इश्क़, पछताओगे,यहां सूखी नज़रे है, अश्क भी ना पाओगे।। ढूंढ़ती सी कभी, जिंदगी आ गई थी,खंडहरों में मेरे, उसको भी ना मिला बसर, सब कुछ रुका सा है, थमा सा है यहां,जब से वो गई है, वक़्त ठहर सा गया। देव

मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं

खुद ही, खुद का, इम्तिहान लेता हूं,कभी अव्वल, कभी नाकाम होता हूं,मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं। मोहब्बत है तो है, नहीं मैं डरता हू,कुछ अपनाता हूं, कुछ छोड़ देता हूं,मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं। मुलाक़ात तो होती है, अक्सर उससे,कभी देखता हूं, कभी कुछ बोल देता हूं,मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं। देव