खौफ, खौफ किसका है!

पाक दामन को, दागदार कर जाते है,
कुछ लोग, बेवजह छींटे उछाल जाते है।

कब तक रहेंगे बंदी, बेमोल असूलो के,
सलाम है उन्हें, जो बंधन तोड़ जाते है।

वक्त आ गया, दिखा दो, फिर ज़माने को,
बेवजह नहीं, हम किसी रास्ते पर जाते है।

खौफ, खौफ किसका है, और क्यूं कर है,
हम खुद बोतें है, और खुद का खाते है।।

देव

26/12/2020, 12:22 am

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