|| तुम जो पहलू में थे बैठे, वक्त को भूले थे हम ||

पिलाया था नजरों से,जाम ए मोहब्बत अपना,और कहती हो हमे,के प्यार ना हो तुम जो पहलू में थे बैठे,वक्त को भूले थे हम,ताकतें थे बस तुम्ही को,खोए से, तुममे थे हम। तुम जो पहलू में थे बैठे,वक्त को भूले थे हम,ताकतें थे बस तुम्ही को,खोए से, तुममे थे हम। कब ढली थी शाम और,कब सुबह … Continue reading || तुम जो पहलू में थे बैठे, वक्त को भूले थे हम ||

विकल्प की तलाश

मौका, मौके तो बहुत मिलते हैं, मगर, अक्सर विकल्प की तलाश, में सब रहते हैं। और विकल्प की तलाश, ना खत्म होती हैं, और ख्वाहिशों की फेरहिस्त, बदलती रहती हैं। यूं नहीं कि, इंसान बदल जाता है, बस, एक मौका मिलता है, मंजूर किए बिना उसे, दूसरे मौके की तलाश में लग जाता हैं। काश! … Continue reading विकल्प की तलाश

मोहलत भी मिली, और किस्मत भी…

मोहलत भी मिली, और किस्मत भी मिली, कुछ लम्हे मिले, जिन्दगी भी मिली। कुछ सांस भी थी, कुछ आस भी थी, जो सोची ना थी, वो फुरसत भी मिली। अपनो के संग में, साथ भी था, हाथो में उसका हाथ भी था, खुशियां भी थी, मुस्कान भी थी, जाने के पहले, जीने की, सौगात मिली। … Continue reading मोहलत भी मिली, और किस्मत भी…

जिन्दगी है, ये कुछ तो खेल, खेल रही थी।

उसके जेहन में, कौंधते सवालों का, जवाब ढूंढने की कोशिश में, मैं अपने सवालों को, जरा भूलने लगा था, वो मुझको, अनदेखा कर, बढ़ रही थी, मैं उसकी राहों के काटें, बुन रहा था। उसके ख्वाबों को सच्चाई बना, परोसने की ललक में, ना जाने कितनी हकीकते मेरी, मुझसे छूट रही थी, और वो लिए … Continue reading जिन्दगी है, ये कुछ तो खेल, खेल रही थी।

जिन्दगी, है तो जिंदा हूं…

जिन्दगी, है तो जिंदा हूं, वरना मैं, मैं कहा हूं, धड़कने तो चलती रहती है, मगर, इनमे मैं कहा हूं। मेरा वजूद, मेरी शख्शियत का, होना नही है, मेरा वजूद, इन सांसों का, चलना नहीं है, मेरा वजूद, जेहन में, औरों के होने में है, मेरा वजूद, मेरे नाम के,चर्चे में है। लगता है, हां, … Continue reading जिन्दगी, है तो जिंदा हूं…

कुछ पल जो, चांद को ताका…

कुछ पल जो, चांद को ताका, तो चांद ने कहा,रहता है जमी पर, और ख्वाब चांद के देखता है, चांद के घमंड को देख, मैने कहा, आकाश में कहां तुझे इश्क मिलेगा, मोहब्बत तो इंसान करते है, तुझे भी आना इक दिन जमीं पर पड़ेगा।। देव 27/02/2021, 8:13 pm

अरमान बड़े छोटे, मगर हौसले बुलंद थे…

अरमान बड़े छोटे, मगर हौसले बुलंद थे, कागज की कश्ती ले, बारिश में निकलते थे। पास कुछ ना होता था, मगर साथ काफी था, तुतलाती आवाज में, चल ना याल, निकलता था। स्कूल के अंतराल में, सबके टिफिन निकलते थे, खाने की होड़, और पार्टी के रोज दौर चलते थे। उम्मीद, कभी किसी यार से, … Continue reading अरमान बड़े छोटे, मगर हौसले बुलंद थे…