|| तुम जो पहलू में थे बैठे, वक्त को भूले थे हम ||

पिलाया था नजरों से,
जाम ए मोहब्बत अपना,
और कहती हो हमे,
के प्यार ना हो

तुम जो पहलू में थे बैठे,
वक्त को भूले थे हम,
ताकतें थे बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे थे हम।

तुम जो पहलू में थे बैठे,
वक्त को भूले थे हम,
ताकतें थे बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे थे हम।

कब ढली थी शाम और,
कब सुबह सी हो गई,
तेरे दामन में यूं आके,
फिक्र थी जो, खो गई।
तुझको पाने जो लगे,
ख़ुद को ही, खोये थे हम।
ताकतें थे बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे थे हम।

तुम जो पहलू में थे बैठे,
वक्त को भूले थे हम,
ताकतें थे बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे थे हम।

मैं कहां था यार तेरा
मैं कहां अनजान था,
कुछ थी मेरी, आरजू
कुछ तेरा अंदाज था।
इश्क़ तेरा क्या चढ़ा,
दीवाने लग रहे थे हम।
ताकतें थे बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे थे हम।

तुम जो पहलू में थे बैठे,
वक्त को भूले थे हम,
ताकतें थे बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे थे हम।

तुम जो हमसे, हो मिले,
हम कहां अब हम रहे,
तुम में हम है दिख रहे,
हम में तुम, दिखने लगे।
ना तलाशों ख़ुद को तुम,
क्यूँ तलाशे ख़ुद को हम।
ताकतें हैं बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे हैं हम।

तुम जो पहलू में हो बैठे,
वक्त को भूले है हम,
ताकतें है बस तुम्ही को,
खोए से, तुममे हैं हम।

ताकतें है बस तुम्ही को
वक्त को भूले है हम,
तुम जो पहलू में हो बैठे,
खोए से, तुममे हैं हम।

देव

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