मोहब्बत का हिसाब बदल गया

मोहब्बत का हिसाब बदल गया,
जाने कब, कहा बदल गया,
अब कहां इश्क में दीवाने मिलते है,
हर मोड़ पर, नए चेहरों से, मिलते है,
ना दिलो में चाह है,
ना इश्क का जुनून है,
किसी को हुस्न का,
किसी को रुतबे का गुरूर है,
ख्वाहिशें भी तो आसमान से,
कहीं ज्यादा उड़ान भरती है,
नहीं जानते, पतंगे
बिना डोर के नहीं उड़ती है,
जमी से छूट जाओगे,
कहा जमीं पर, रह पाओगे,
शीशे से है रिश्ते यहां,
पल में टूटा हुआ पाओगे,
वक्त था, जब बस,
मोहब्बत की भरमार होती थी,
इश्क में दिमाग की,
नहीं दरकार होती थी।।

देव

01/09/2020, 12:07 am

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