|| तुम जो पहलू में थे बैठे, वक्त को भूले थे हम ||

पिलाया था नजरों से,जाम ए मोहब्बत अपना,और कहती हो हमे,के प्यार ना हो तुम जो पहलू में थे बैठे,वक्त को भूले थे हम,ताकतें थे बस तुम्ही को,खोए से, तुममे थे हम। तुम जो पहलू में थे बैठे,वक्त को भूले थे हम,ताकतें थे बस तुम्ही को,खोए से, तुममे थे हम। कब ढली थी शाम और,कब सुबह … Continue reading || तुम जो पहलू में थे बैठे, वक्त को भूले थे हम ||