वो ख्वाहिशें गिनाती रही ॥

वो ख्वाहिशें गिनाती रही,
मैं ख्वाब देखता रहा,
वो खुद पर इतराती रही,
मैं उसको निहारता रहा।

वक्त था, बिन कहे
हाल ए दिल, यूं ही निकल गया,
वो ख्वाहिशें समेटने चल पड़ी,
मैं ख्वाब बिखरते देखता रहा।

अब बिखरे हुए ख्वाबों के,
हर टुकड़े में तसल्ली से देखता हूं,
वो भी, वही खड़ी है,
मैं भी वही खड़ा हूं।।

देव

21/09/2020, 11:21 pm

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