भुला कर मुझको, मैं, मैं बनना चाहता हूंँ,
जो मैं नहीं हूं, वो मैं बनना चाहता हूंँ।
मुझे मुझसे ना जाने कब, जुदा कर दिया,
ना उसको पता था मेरा, ना मुझको पता चला,
अब मैं खुद को, जानना चाहता हु
जो मैं नहीं हूं, वो मैं बनना चाहता हूं।
भुला कर मुझको, मैं, मैं बनना चाहता हूं,
जो मैं नहीं हूं, वो मैं बनना चाहता हूं।।
जाने कब से कुछ अनजान सा, खुद से था मैं,
क्या है पहचान मेरी, ढूंढ रहा था मैं,
खुद में से खुद को, पाना चाहता हूं,
जो मैं नहीं हूं, वो मैं बनना चाहता हूं।
देव
29/09/2020, 12:57 am