यही, बस यही प्यार है।

इंतज़ार, तुम्हारा कब से था,
और तुम मिले भी तो इस मोड़ पर,
जहां, मंजिल भी यहीं है,
और रास्ते कोई भी नहीं,
कैसे कहें, तुमसे बढ़कर,
कोई और नहीं।

सफर था तन्हा, तुम ना थे,
मगर कोई तो था, और वो साथ था,
शायद, सही ही चल रही थी जिन्दगी,
और अचानक, तुम आ गए,
जो तब ना हुआ, वो अब कर गए।

सोचा ना था, खो जाऊंगी यूं,
तेरी सोच में यूं कि, भुला खुद को,
बस तुझे चाहूंगी, सिर्फ तुझे,
शायद, अब तक जो था,
नहीं पता, क्या वो प्यार था, मगर,
अब जो हुआ है, यही, बस यही प्यार है।

देव

27/09/2020, 9:43 pm

Leave a Reply