फिर से, वही बातों का, दस्तूर चल पड़ा है॥

फिर से, वही बातों का, दस्तूर चल पड़ा है,
गली में मेरे नाम की चर्चा है,
निकल पड़े है, फिर से वो पर्चे लेकर,
क्या उनका नाम, मुझसे नहीं जुड़ा है।

हद है, कि मेरा नाम, यूं सबसे जुड़ा है,
कौन कहता है, कि ये अफवाह है,
मगर जिसने भी, मेरा नाम कभी लिया है,
वो भी तो, किसी वास्ते मुझसे जुड़ा है।

लोग वही दिखाते है, जो आइना उन्हें बताता है,
अपने अक्स को तो, है कोई खूबसूरत बताता है,
ये अक्स भी कहां, अपना हो पाता है,
टूटते ही शीशे के, टुकड़ों में, बिखर जाता है।।

देव

03/10/2020, 8:14 pm

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