कुछ पल ही सही,
बिताए जो साथ है,
उन्ही पलों की दास्तां,
कहते मेरे अल्फ़ाज़ है।
तेरे ख्वाबों में जो बसा,
कुछ तो उसमे खास बात है,
यूं ही नहीं रहती, तेरे चेहरे पर,
हर पल, मुस्कुराहट है।
रागिनी बजती, छम छम करती,
पायलिया तेरी, है सब कुछ कहती,
राधे नाचे, बांसुरी की धुन पर,
और तू सोचे, हम सब अनजान है।
देव
17/12/2020, 11:34 pm