तुम हो तो मैं हूंँ वरना
कब का मिट जाता,
टूट तो मैं गया था,
ख़ाक में मिल जाता।
तुम ही तो थे, जो खड़े थे,
मिला कांधा मुझसे,
तुम्हारी नज़रों मे ही तो,
देखा था जीवन मैंने।
तुम्हारी बिंदास हसीं ने,
मुझे फिर हसना सिखाया,
भूला गम अपने फिर,
आगे बढ़ना सिखाया।
तुम ही तो थे, थाम
हाथ मेरा हाथो में अपने,
जोड़ा हर टुकड़े को, जो
बिखरे थे मेरे सपने।
आज भी, तुम ही तो ही
तब ही तो मैं हूंँ,
तुम ही तो हो जिसने,
मुझे मुझसे मिलाया।।
देव
27/12/2020, 3:44 am