एक और नया साल है!

लो, फिर से आ गया, नया साल,
अभी पिछले साल ही तो आया था,
उमंगे उम्मीदों सपनो को उड़ान देने,
कुछ पूरी हुई, कुछ वही रुकी है,
जाने किसका इंतज़ार कर रही है,
अब एक और नया साल है,
उम्मीदों का भंडार है, और जो गया,
उससे कोई शिकायत भी नहीं है,
क्यूं की उसने, इतनी अनमोल,
कुछ घड़ियां भी दी है।
कौनसी, अरे माना, लेकर
कोरोना आया था,
डर, अकेलापन साथ लाया था,
मगर कुछ खोया, , तो कुछ पाया भी है,
यूं ही नहीं साल बीस बिताया है,
अपनो को अपना वक्त दिया,
अपने लिए भी वक्त लिया,
जो ना सोचा था कभी,
ऐसा ऐसा काम किया,
दिनों में महीनों,
महीनों में सालो की जिया,

चलो, अब फिर एक और साल आया है,
इनाम में इसने भी वही कुछ पाया है,
मगर, इस बार डर नहीं विश्वास है,
जीये हर पल को, वही इंसान है।।

देव

01/01/2021, 1:04 am

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