कायम है ऐतबार किया।

आज फिर बरसा है, आसमान,
फिर से, बे छिछक, बे शुमार,
आज फिर, याद आया है मुझे,
तुझसे मिलना, वो एक बार।

आज फिर, तेरे होने का शुक्रिया,
खुदा को नज़र, फरमा दिया,
आज फिर, तेरी मोहब्बत पर,
कायम है ऐतबार किया।

आज फिर, तुमने मुझे जह़न मे,
कुछ पल को, याद किया,
आज फिर, अपनी मुस्कुराहट को,
तुमने मेरे नाम किया।

आज फिर, जागी है तमन्ना
तुझे पाने की।
आज फिर, उठी है ख्वाहिश,
तेरा हो जाने की।

देव

05/01/2021, 10:03 am

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