ख़्वाब, देखती हूंँ बहुत,
और पूरा भी कर रही हूंँ,
धीरे धीरे चलना मेरी आदत है,
और मैं लगातार चल रही हूंँ।
लगातार चल रही हूंँ,
जिन्दगी की रफ्तार से,
ना थोड़ा आगे, ना थोड़ा पीछे,
मिला कदम, ज़माने की ताल से,
मगर ये क्या, जब भी,
देखती हूं आइना, लगता है,
कुछ ज्यादा मैं, बड़ी हो गई,
उम्र जिन्दगी की रफ्तार से,
कुछ ज्यादा बढ़ गई।
देव
12 jan 2021