बस तुम्हारा नाम लेता हूंँ।

तुम हो यहीं कहीं, पहचान लेता हूँ,
तुमसे मिलना हो, तो दिल में झांक लेता हूंँ।।

कुछ धुआ धुआं सा, बिखरा है हर तरफ,
बड़ा कर हाथ अपना, तुम्हे थाम लेता हूँ।

गुस्ताखियां करी है मैंने, और कुछ तुमने भी,
गुस्ताखी यों में छिपा प्यार, पहचान लेता हूँ।

बोलने को यूं तो, बहुत कुछ है मगर,
लब खोलता हूँ, बस तुम्हारा नाम लेता हूंँ।

देव

02/01/2021, 3:27 pm

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