नज़रे तेरी!

बहुत कुछ कह रही है, नज़रे तेरी,
सिमट गई है इनमें, दुनिया मेरी,
मेरी नजमो को, कहाँ कोई है पड़ता,
ठहर जाती है जो नज़रे, नजरो पर तेरी।।
और ये रुकती सी, आती है,
मुस्कुराहट, जो तेरे चेहरे पर,
थमी रह जाती है सांसे,
इक बार हेलो, तेरे कहने पर।।
देव
14/01/2021, 5:04 pm

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