आजादी का डंका !

यूं तो आजादी की आग,
हर तरफ थी लगी,
कहीं अहिंसा के पुजारी
कहीं शीशों की लड़ी।
मगर कहीं से एक,
और महात्मा आया
जिसने खून के बदले
आजादी का डंका था बजाया।
ना जात, ना पात
ना धर्म की परवाह थी
देश के लिए शहीद होने
हर कौम तैयार थी।
ब्रिटिश से लड़ने को,
जापान से हाथ मिलाया,
विश्व युद्ध का वक्त था,
विहंगम दृश्य था पाया।
धन की जब बात आईं तो,
घर घर से, आवाज आई,
बहने, माताएं, बहुओ ने
हर जेवर थे ठुकराए।
आगे आगे, आजाद खड़े थे
पीछे हिन्द की सेना,
आसान नहीं था, ब्रिटिश से,
यूं ही लोहा लेना।
हिंदुस्तान की धरती पर,
थी आजाद हिंद फौज पहुंची,
तभी अहिंसा के भगतो ने,
लंगोट ब्रिटिश की थी पकड़ी।
अपनो ने है अपनो का,
किया तिरस्कार था तब,
अंग्रेजो को भी जीत की,
उम्मीद नहीं थी जब।
हार कहाँ, वो जीत थी एक
ब्रिटेन युद्ध से थर्राया था
आग यहाँ की थी ब्रिटेन पहुंची
क्वीन का सिंहासन हिलाया था।
निर्णय आजाद भारत का,
उसी युद्ध से आया था,
अदृश्य हुआ वो महात्मा
सुभाष चन्द्र बोस कहलाया था।।
देव
25/01/2021, 4:54 pm

Leave a Reply