मेरे ज़हन में, अब भी हैं

तन्हाइयो मे, मैं
अक्सर रो लेता हूंँ,
समझ कर हाथ उनके,
आंसू खुद से पोछ लेता हूंँ।
है टूटा सा ये दिल, मगर,
ये दिल तो उसका है,
मेरे ज़हन में, अब भी
बसेरा उसका है।
नहीं हैं इश्क़ उसको,
ना मैं यू याद आता हूंँ,
दुआ करता हूंँ उसकी,
जब खुदा के दर पर जाता हूंँ।
देव
09/02/2021, 3:00 am

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