मैं इंसान हूंँ, जमीं वाला

उसके हर गम, हर खुशी में, मैं शामिल हूंँ,
मगर जब आंख मेरी, भर आए, मैं तन्हा क्यूं हूंँ।
हाल ए दिल जानते है उनका,
खबर हर पल की रखते है,
आंसू जब बहते है मेरे,
उन्हे ना पाऊं, होता क्यूं है।
वो फरिश्ता है, मैं इंसान हूंँ, जमीं वाला,
मेरे जों खवाब है, उनकी जिन्दगी का लम्हा है,
उनकी खुशियों का जश्न मनाते है, मनालो,
पर मेरे जनाजे पर, हसंना क्यूं है।
उसके हर गम, हर खुशी में, मैं शामिल हूंँ,
मगर जब आंख मेरी, भर आए, मैं तन्हा क्यूं हूंँ।
देव
11/02/2021, 1:31 pm

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