मोहलत भी मिली, और किस्मत भी मिली,
कुछ लम्हे मिले, जिन्दगी भी मिली।
कुछ सांस भी थी, कुछ आस भी थी,
जो सोची ना थी, वो फुरसत भी मिली।
अपनो के संग में, साथ भी था,
हाथो में उसका हाथ भी था,
खुशियां भी थी, मुस्कान भी थी,
जाने के पहले, जीने की, सौगात मिली।
सब जीके, उस दिन सोए थे हुए,
सपनो में अपने थे, खोए हुए,
मैं सपने छोड़ कर उड़ता चला,
पल में मुझको थी, मुक्ति मिली।।
देव 28/02/2021, 11:59 pm