पर्दा, इक बार तो हटा

तेरी रात का हाल, तेरी तस्वीर बताती है
तू किसी और को भी, तहे दिल से चाहती हैं

इतनी मगशूलियत से, क्यूं तस्वीर खिचाती है
उसी शिद्दत से अपने, आंगन में जड़ाती है

इक तस्वीर हमारी भी, तू एक बार तो लगा
मेरे वजूद का अहसास, इक बार तो करा

ना, फिक्रो जहां की, अब मुझको पसंद है
तू पर्दा अपनी आंखो से, एक बार तो हटा

देव

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