अंतर्मन

in my journey, to meet and know story of friends, I met a dear friends yday. Heard little bit about her story. And here, tried to give words to her feelings.

Thanks to her…..

कल ही की तो बात है
हाथो में हाथ था
कुछ एहसास था
जब वो मेरे पास था

जाने कहा गए वो पल
खुशियां जो दरवाजे की चौखटों पर
फूलो की तरह टंगी रहती थी

बगीचे में फूलो की खुशबू की तरह
हसीं घर गूंजती में रहती थी
उसके आने की आहट
दिलो में झंकार करती थी

पर कुछ ही दिनों में क्या हुआ
सन्नाटा क्यूं छा गया
इतनी जल्दी क्या थी उस
कि हमे यह छोड़,
जाने कहा चला गया

अभी तक शामें उसका
इंतजार करती है
घड़ी में 5 बजे के घंटे से
दिल की धड़कने बढ़ती है

सूने घर में, उसकी आवाज
सुनाई देती है
बच्चो का ध्यान रखने
उसकी रूह, आस पास रहती है

अब तो अकेले भी बैठे तो डर लगता है
अपना घर भी बड़ा सूना लगता है
अब तो कोई नहीं, जिसे दर्द बता पाए
अपनी तन्हाइयो का जिक्र
किसको बताए

वो नहीं आयेगा अब
अहसास अब हो चुका है
वक़्त आगे बड गया
पर कभी यादों में रुका है

जो बहा ले जाती है, मुझको
जब कोई मुझे झकझोरता है
मेरे अंतर्मन में छीपे किस्सों को
कोई अपना बटोरता है।

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