फकीरा

फकीरा बना फिरता हूं मैं
क्या लेना संसार से
चार दिन की जिन्दगी
फिर मिलना भगवान से

सांसों का हिसाब क्यूं मैं रखू
जब रुकनी है रुक जाएगी
बेखौफ जीलू जिंदगी
मौत आनी हैं तब आएगी

इश्क़ खुद से, खुदा से
और खुदाया इंसान से
कर ले बिना मतलब के
बस मोहब्बत रह जाएगी

देव कहता है ओ यारो
फ़िक्र को रखो तुम ताक में
हंस लो, हंसा लो, मुस्कुरा लो
घड़ी दुबारा ना ये आएगी

देव

Leave a Reply