तू है तो मैं हूं, मैं हूं तो तू है…

मेरी कहानी, अधूरी है, तेरे नाम के बिना तेरा सपना, नहीं पूरा है मेरे दीदार के बिना तू मेरी फ़िक्र और जिक्र में है शुमार तुझसे हैं रोशन मेरी कायनात मेरी पहचान तेरे बिना कहा तू नहीं तो मेरा अस्तित्व कहा तेरे हाथो की मेहंदी भी ये कहती है नाम मेरे से, रंग लाल देती … Continue reading तू है तो मैं हूं, मैं हूं तो तू है…

खुला परिंदा..

मेरी मौशिकी में वो खुद को दूंडती है हर लब्ज़ में छुपी, बातें खोजती है आइने में, जब भी खुद को निहारती है मंद आवाज में, कुछ तो गुनगुनाती है फ़िक्र छोड़ जहां की, सजती संवरती है ताने उड़ा हवा में, बेखौफ गुजरती है जीना, जो भुला दिया था कभी रस्मो रिवाजों के खातिर अब … Continue reading खुला परिंदा..

ना मुझे मेरे नाम से जान पाओगे

नाम, मुझे मेरा ही लेकर पुकारोगे तो मैं आऊंगा वरना, तेरी आवाज़, यू ही टकरा के दीवारों से लौट जाएगी तेरे कानों में तेरे लब्ज़ गुनगुनाएगी जो मैं नहीं, जरूर वो तू होगा गुनाहों का हिसाब, तेरे खाते में, तकदीर लिखती जाएगी मुझे भी पता है, ये नाम यही रह जाएगा मेरी रूह चलीजाएगी पर, … Continue reading ना मुझे मेरे नाम से जान पाओगे

रिश्तेदार

कुछ लोग सोचते है, कुछ करते है, तुम्हारे बारे में, कुछ अनजान बने रहते है सवाल बहुत पूछते है अपने ज्ञान को लोगो की अज्ञानता से बड़ाना चाहते है मिलने पर, बस आप ही सबकुछ ही उनके ये जताना चाहते है लेकिन, पीठ फिरते ही हजार कमियां गिनाना जानते है हां, मैं उनकी ही बाते … Continue reading रिश्तेदार

बाते नींव के पत्थर की..

खुद के बुलंदी छूने को, मुझे नींव का पत्थर बनाते हो सालो से दफन हूं जमीन में पूछने भी नहीं आते हो अपनी दीवारों पर हर साल रंग रोगन करवाते हो मेरा नाम भी अक्सर जिक्र में भूल जाते हो क्यूं, बनूं नींव का पत्थर क्या मिलेगा मुझको, बताओ क्यूं नहीं में गुंबद पर बन … Continue reading बाते नींव के पत्थर की..

बंजर जमीन पर, कंक्रीट का जंगल….

बंजर जमीन पर, कंक्रीट का जंगल बड़ी रफ्तार से बड़ता, ये शहर आसमा को छू लेने की ख्वाहिश में जमीन से दूर जाता, ये मंजर नीवों को कौन पूछता है अब खोखली होती जड़ों के ये घर उड़ना बहुत दूर चाहता है पंछी अपनों से ही कतरे है इनके पर तड़प है गांव की मिट्टी … Continue reading बंजर जमीन पर, कंक्रीट का जंगल….

नहीं रहेगी ये जिंदगी…

सफ़र तो सफ़र है लोग मिलते है हर मोड़ पर बिछड़ने के लिए यादों की किताब में कुछ और पन्ने जोड़ने के लिए फ़ुरसत के पलो में पड़ते रहते है बीते पलो के किस्से कहानियां कुछ दर्द भरे नगमे कुछ खुशहाल अठखेलियां यही तो है, जो तब काम आएगा जब, तन्हा रहूंगा मैं और यादों … Continue reading नहीं रहेगी ये जिंदगी…

गुनाह देखने का..

बड़े तल्ख अंदाज़ से उन्होंने नज़रे घुमाने को कहा जैसे मुलजिम हो हम कोई गुनाह किया उन्हें देखने का बस, एक झलक ही तो नजर आईं थी उनकी काफी अरसे बाद बस, ठिठक कर वहीं जम गए थे हमारे कदम नज़रे, गड़ी की गड़ी रह गई थी और वो, अपने ही सपनों में गुम चलती … Continue reading गुनाह देखने का..

एक बार फिर करेंगे प्यार

इश्क़ करने की खता करी थी हमने भी इक बार माना, मिली बेवफाई हमे भी इक बार तो क्या, इश्क़ का क्या कसूर जब है हुज़ूर मगरूर रास्ते बदल कर हम फिर चलेंगे शीशा नहीं हम, जो टूट जाए, तो फिर नहीं जुड़ेंगे एक बार फिर से मिले नज़रे फिर से हो दीदार यार का … Continue reading एक बार फिर करेंगे प्यार

इनाम ए इश्क़

वो बोलते ही रह गए मैं आगे निकल गया किसने क्या कहा, क्यूं कहा कुछ ना याद रहा बेकार, आवारा, और ना जाने क्या क्या नाम मिले मुझको पहले जब इश्क़ किया था ये इनाम मिले मुझको फिर भी, पागल है दिल कहा प्यार के बिना रहता है फिर से मोहब्बत करले धड़कन पे हर, … Continue reading इनाम ए इश्क़

ढाई आखर

सुलझ सुलझ कर जो किया प्रेम कहा कहलाए उलझे धागा आपस में वस्त्र तभी बन पाए ढाई आखर प्रेम का राधा कृष्ण दिखाए अगाध प्रेम संग में करे मिलन नहीं हो पाए प्रेम में को लालच करे नहीं प्रेम वो पाए देव काहे जब त्याग करे तभी प्रेम फल पाए देव

आसमानी परिंदा

आसमानी परिंदा हूं मनमौजी बाशिंदा हूं मेरा मुकाम अभी बहुत दूर है इश्क़ मेरा नहीं जुनून है बस, चल पड़ा हूं अपनी राहों पर फ़िक्र नहीं है मुझे अपनी रातों की तन्हा भी जी लेता हूं यारो की महफ़िल में पी लेता हूं मेरे अफसाने लोग सुनाते है पर मेरे साथ चलने से कतराते है … Continue reading आसमानी परिंदा

मेरा इश्क़, मेरी नज़्म से मिल जाए….

हर एक लब्ज़ को… कई बार खंगेलता हूं… तुझे ढूंढने के एवज में…. नज़्में हजार लिखता हूं। जाने, कौनसी महफ़िल, किस दर पर दीदार हो तेरा। तेरी एक झलक पाने को, हर चौखट पे दस्तक देता हूं।। तेरी खुशबू, आज भी , जेहन में बसी है मेरे। यू ही नहीं जिक्र तेरा नज्मों में है … Continue reading मेरा इश्क़, मेरी नज़्म से मिल जाए….

अकेला हूं, पर बिंदास जीता हूं

मौसम भी बेहिसाब बेईमान है जब वो नहीं साथ, घटाओ का बिगड़ा ईमान है बरसात का भी कुछ ऐसा मिजाज है बस बरसती ही नहीं, छेरती साज है टप टप की आती मधुर आवाज है बचपन का बिंदास भीगना आता याद है अब भी, वो बचपना और वो जवानी है याद छोड़ा नहीं है मैंने … Continue reading अकेला हूं, पर बिंदास जीता हूं

इश्क़ रूहानी

बस लिखता ही तो हूं पाबंदी लिखने पर ना लगाओ वरना, तारीफ़ तेरी कैसे और कौन करेगा इश्क़ के नाम पर हुस्न को चाहते तो बहुत है इश्क़ के बिना, तेरी तरफदारी और कौन करेगा रोज बस तकता ही तो हूं लोग तो घूरते है तुझे राहों में तुझे देखे बिना, तेरा चेहरा याद और … Continue reading इश्क़ रूहानी

तू कदम रख दे अपने, बन जाए दीवाली हर दिन…

हुस्न तेरा मुझे इक पल में मदहोश कर गया आइना रोज तुझे कैसे देखता होगा तेरी जुल्फें है घनी लगती है बदलो कि टोली खोल दे तू इन्हे बरसाने दे घटाए जम कर हस दे एक बार बरसा दे खुशी हम पर जाने कब से सुखी पड़ी बस्ती मेरी सुना आंगन है मेरा सूनी है … Continue reading तू कदम रख दे अपने, बन जाए दीवाली हर दिन…

सबके दिलो में बस जान की तकल्लुफ करते हैं।।

जीवन यू ही सुकून से निकल जाता, गर उसमे खूबसूरती का अहम। मुझमें उसे पाने का, वहम नहीं आता।। वो तरपाती रही, हर चाहने वाले को। हम तरसते रहे, बस उसे पाने को।। काश एक बार, राह बदल कर देखी होती। क्या पता, जिंदगी नए मोड़ पर खड़ी होती।। अब भी वक़्त नहीं गुजरा है, … Continue reading सबके दिलो में बस जान की तकल्लुफ करते हैं।।

आंसू भी नहीं झलकते, हो गया है हाल मेरा…

टूटे हुए शीशों के टुकड़ों को जोड़ने की जहमत बहुत की ता जिंदगी आइना जुड़ तो गया दाग़ ताउम्र रहेंगे साथ मेरे छोड़ दिया साथ, यांदे भी छोड़ दी कब की उसके हर लब्ज हर बात भूल चुकी अब तो जिगर का टुकड़ा मेरा जब भी पूछता है हाल मेरा आंसू भी नहीं झलकते, हो … Continue reading आंसू भी नहीं झलकते, हो गया है हाल मेरा…

वक़्त कैसे गुजर गया, कुछ पता ना चला…

वक़्त कैसे गुजर गया कुछ पता ना चला जो जानते भी ना कभी थे एक दूसरे को एक दिन मिले कॉलेज की सीढ़ियों पर चलने लगे बेपरवाह से कभी सीधे कभी बेढंग से राहों पर कभी रास्ता मिल गया कभी रास्ता बनाते गए वक़्त कैसे गुजर गया कुछ पता ना चला पर एक डोर ने … Continue reading वक़्त कैसे गुजर गया, कुछ पता ना चला…

अपने ख्वाबों के राजकुमार का….

तसल्ली देते रहे, दिल ए नादान को, उनकी झलक एक मिल जाए कभी कद्रदान को ख्वाबों में हजार, चेहरे बना डाले इंतजार में उसने कभी तो होगा, मिलना जान का उसकी जान से अब से सांसें भी थम ना रही डगमगा रहे है कदम जब से थामा है हाथ उसने अपने ख्वाबों के राजकुमार का … Continue reading अपने ख्वाबों के राजकुमार का….