वो आज भी मेरे पहलू में बैठा है

वो आज भी मेरे पहलू में बैठा है
मैं आज भी उसकी बाहों में समाई हूं
वक़्त दूर, बहुत दूर ले गया उसे मुझसे
तो क्या, दिल में अब भी यादें समाई है

खोल लेती हूं अक्सर, मेरे यादों का पिटारा
कुछ फैला है, एल्बम में,
काफी शोक था उस फोटो खींचवाने का
और कभी खोल लेती हूं, अलमीरा उसकी
अब भी उसके कपड़ों में वहीं भिनी महक आती है
अब भी, मेरी हथेली, आज क्या पहनोगे
सोचते हुए, शर्ट निकलती है
अब भी, उसकी फोटो में उसकी हंसी सुनाई देती है
अब भी घर में अक्सर, जरा सुनना, की आवाज आती है

बस, यही बहुत है, मेरे अकेले जीवन को रंगीन करने को
अब दिल नहीं करता फिर से मोहब्बत करने को
करू भी कैसे, दिल तो एक बार लगा चुकी हूं मै
और वो ले गया हमेशा के लिए, किसी और दुनिया में
और छोड़ गया है यादें अपनी, ढेर सारी
हर अवसर पे अपनी तस्वीर दिखाने को
उसे पता था, अकेलापन बर्दास्त नहीं है मुझे
इसलिए छोड़ गया किस्से हजार, मन बहलाने को

देव

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