वो आज भी मेरे पहलू में बैठा है

वो आज भी मेरे पहलू में बैठा है मैं आज भी उसकी बाहों में समाई हूं वक़्त दूर, बहुत दूर ले गया उसे मुझसे तो क्या, दिल में अब भी यादें समाई है खोल लेती हूं अक्सर, मेरे यादों का पिटारा कुछ फैला है, एल्बम में, काफी शोक था उस फोटो खींचवाने का और कभी … Continue reading वो आज भी मेरे पहलू में बैठा है

दिल में है जीने के अरमान, जी रहे है हम

आज फिर सुबह हुई, और मैं थोड़ा तफरी पर निकली बगीचे में कुछ लोगो से का हुजूम दिखा लगा गपशप में मगशूल होंगे चलो हम भी शरीक होते है कुछ सुनेंगे कुछ सुनाएंगे थोड़ा हंसने बहुत हसाएंगे बस, इसी उम्मीद से चल दी उसी भीड़ में मिल गई पर ये क्या, यहां तो शिकायतों का … Continue reading दिल में है जीने के अरमान, जी रहे है हम

उनकी अमीरी देख आए ये विचार है।

ना घर में टीवी, ना हाथ में मोबाइल ना खिलौनों की भरमार है नटखट सी अठखेलियों में गुजरता है दिन रात में सपने अपार है ना फ़िक्र कुछ खोने की, बस पाने की चिंता समझते है जिंदगी को करीब से उम्मीद इनकी कायम है आज एक और दिन गुजर जाए बस, दो वक़्त का खाना … Continue reading उनकी अमीरी देख आए ये विचार है।

अदा तेरी, कुछ कम ना थी

अदा तेरी, कुछ कम ना थी उस पर, तेरा, जरा सुनना, बोलना मेरा मुड़ना, तेरा एकटक देखना फिर कुछ नहीं बोलना मुस्कुराना, सिर को होले से झुकना सारी का पल्लू, अंगुलियों में बांधना फिर खोलना, फिर बांधना मेरा पलटना, और तेरी हल्की सी खंखरना बस, हर बार यही सिलसिला ही तो मुझे दीवाना बनाता है … Continue reading अदा तेरी, कुछ कम ना थी

आज फिर उसने पलट कर देखा

आज फिर उसने पलट कर देखा मेरे जज़्बात को उलट कर देखा नज़रों में ही हाले दिल बयां कर गई मंजिल कुछ कदम और करीब आ गई कोशिशों को मेरे एक मुकाम मिला बेकार दिल को मेरे एक काम मिला नींद कब की रुसवा बैठी थी मुझसे सपने सजने का, कारोबार मिला देव

मोहब्बत करने की कुछ वजह तो दो, क्यूं में बेवजह कर लूं।

मोहब्बत करने की कुछ वजह तो दो, क्यूं में बेवजह कर लूं। पहले ही, क्या कम दाग़ लगे है हम पर, क्यूं मैं एक और गुनाह कर लू।। अभी तो हरे है जख्म मेरे, जो दिए थे कभी, जान ने जान पे। जान, ना निकली, ना छोड़ी, बेगैरत वो बला निकली।। अभी भी मुलाकात होती … Continue reading मोहब्बत करने की कुछ वजह तो दो, क्यूं में बेवजह कर लूं।

कृष्ण बसे है मुझमें, तुझमें हर कण कण में।

कृष्ण बसे है मुझमें, तुझमें हर कण कण में।फिर क्यूं ढूंढे तू खुदा के, मंदिर में मस्जिद में।। मन ही मंदिर, मन ही मस्जिद, मन ही तो गुरुद्वारा है।मूरत उसकी जहां बसा लो, वहीं समझो उपासना है।। स्वयं को ढूंढ ले बंदे पहले, तू खुदा का साया है।प्यार खुद से तो पहले करले, बाकी सब … Continue reading कृष्ण बसे है मुझमें, तुझमें हर कण कण में।

तू हर वेश में जंचती है

तू हर वेश में जंचती है, हर रंग तुझपे फबता है तू फैशन नहीं करती फैशन तुझसे निकलता है ये पहली बार नहीं, देखा है पहले भी कभी तेरी जुल्फों से तेरा हुस्न और निखरता है नज़रे रुक जाती है, कदम थम जाते है साडी का पल्लू, तेरे कंधे पर जब सिमटता है तेरा अंदाज़, … Continue reading तू हर वेश में जंचती है

आशिकों की आज, दीवाली आई है

बला की खूसूरती, नजर आईं है जैसे हूर खुद, जमीं पर उतर आई है माथे पर बिंदी, हाथो में कंगन और नीली सारी में, तुम पर खूब भाई है माना महीना सावन का, गुज़र गया यू ही तेरे लहरिए ने, कितनो पर बिजलियां गिराई है बलखाई कमर को कस, कंधे से लटकते पल्लू ने रास्ते … Continue reading आशिकों की आज, दीवाली आई है

मेरे वजूद को रोशनी देती है

दूरियां भी कभी मायने रखती है तुझे देखने का मौका देती है पाने की ख्वाहिश मैं रखता नहीं तुझे देख सकूं हर दिन, तमन्ना यही रहती है निहार सकता हूं मैं तुझे बेपनाह करीब नहीं, पर यही है उम्मीद बनी रहती है तुझे छूकर आती रोशनी की किरणे मेरे वजूद को रोशनी देती है देव

जैसे कह रही हो, तेरे लिए ही मुझे बना था

बला की खूबसूरत ये जमीं नजर आती थी जब, आज वो सारी का पल्लू, हाथ से सम्हाले नजर आईं थीं उसका आज कुछ अलग ही अंदाज था जैसे सारी के पल्लू में छिपाया कोई राज था बड़े अदब से, सलीके से, बैठी थी संग में कैसे देख ले झलक, तनिक भर, जुर्रत है किसमे रौब … Continue reading जैसे कह रही हो, तेरे लिए ही मुझे बना था

हमारे घर की मां मेरी बहने कहलाती थी

तुम थी ना, तो मैं बेफिक्र था भगवान का भी शुक्र था कि तुम थी ना डैडी तो अक्सर दफ्तर में होते थे रात की ड्यूटी होती, तो दिन में सोते थे बहुत लाड थे करते, पर गुस्सैल भी मस्त थे कहीं डांट ना पड़ जाए, रहते हर पल चुस्त थे फिर भी, मैं छोटा … Continue reading हमारे घर की मां मेरी बहने कहलाती थी

पापा, पापा सुनो, पापा सुनो

पापा, पापा सुनो, पापा सुनो बस, जब देखो पुकारता है मेरा बेटा, जब भी मतलब होता है लव यू पापा, यूं आर द बेस्ट की धुन लगाता है वैसे बटर पनीर उसे बहुत भाता है रोज कुछ मस्त बनाओ पापा, दोहराता है पर, महीने में एक बार, उसे पिज़्ज़ा भी याद आता है गार्लिक ब्रेड … Continue reading पापा, पापा सुनो, पापा सुनो

गोपियां भूल जग रास रचाए

मुरली की मधुर धुन सुन करे गोपियां गुन गुन गुन बाजे पायलियां छन छन छन देखो खों गया सबका चितवन सुन धुन कर कन्हैया की चले नदिया बलखाके देखो, लहरे उछलती जावें हवा मंद मंद बहती जावे ये क्या रंग है डाला प्यार में बही बाला गोपियां भटक भटक जावे गगरी छलक छलक जावे वो … Continue reading गोपियां भूल जग रास रचाए

कन्हैया, ये क्या किया

कन्हैया, ये क्या किया, राधा को क्यूं छोर दिया। प्यार में बिछोह क्यूं दिया राधा को क्यूं छोर दिया। माना तेरी है बहुत जिम्मेदारी करनी थी तुझे, कंस को मारने की तैयारी मथुरा को क्यूं प्रस्थान किया राधा को क्यूं छोर दिया देव

स्त्री हूं मैं, स्त्री ही रहने दो

कब तक मुझे संज्ञा दोगे कब तक तुलना मेरी तुम करोगे कब तक मेरे स्पर्श को मापोगे कब तक मेरा तिरस्कार करोगे मैं इंसान हूं, एक दिल मुझमें भी है आंसू मुझे भी आते है, दर्द मुझे भी होता है सम्पूर्ण हूं है, परिपूर्ण हूं मैं जो जिंदा है, अंश मेरा ही है मां भी … Continue reading स्त्री हूं मैं, स्त्री ही रहने दो