मैं, मैं ना रहा

मैं, हमेशा से, ऐसा नहीं था,
ये तो वक़्त ने, मुंह मोड़ लिया,
कुछ पल के लिए, मैं, मैं ना रहा,

मुझे भी अरमान थे,
किसी को चाहूं,
शिद्दत से भी ज्यादा,
और चाहा भी तो था,
पर, कहीं गुम सा हुआ,
जिंदगी के सफ़र में,
के संग चले का, सफर ही ना रहा,
मैं, मैं ना रहा,

दर्द इतने मिले,
राह में मोहब्बत के,
तन्हा छोड़ गए,
करके वादे मोहब्बत के,
आंखे पथरा गई,
नम हो गई पलकें,
किया इश्क़ ने धोका,
मैं, मैं ना रहा,

तभी तो राह, जो ना थी
मेरी, मैं चल पड़ा,
हर बार उठाया किसीने,
हर बार था में गिर पड़ा,
जिसे देखो, नोचने की,
मुझे वो चाह रखता था,
मेरे कमजोर जज्बातों से,
खिलवाड़ करता था,
और मैं भी, यू ही खेलता गया,
मैं, मैं ना रहा,

मिले तुम है मुझे,
जाना फिर से था, मुझको मैंने,
आइने बन तुम अाई थी,
पहचाना था खुद को मैंने,
कहीं जो खो गया था, दर्द में
खुशी का नाम तुम लाई,
मुझे मुझसे मिलाने, मेरा
पुराना रूप तुम लाई,
सच कह रहा हूं,
जो मैं बन गया था, अब
मैं, वो मैं ना रहा।।

देव

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