वो बचपन था, मगर कहा कम था

It’s not about, where you study, it’s all about with whom, and if we have done something, what makes you Lough, life long… Here is another part of my childhood…

वो बचपन था, मगर कहा कम था,
सरकारी स्कूल, पर थी बड़ी कूल,
यही कोई तीसरी या चौथी क्लास थी
मगर, मस्ती पूरी भरी, हुई थी,

थोड़ा क्लास में दब दबा भी था,
क्यों कि, पड़ने में थे अच्छे,
मैडम की आंखो में चढ़े हुए थे,

हम पांच के मजे थे,
मेरी क्लास के, योगी और कालिया
साथ में आभा और नीरज,
जो मैडम के बच्चे थे,

तकरीबन सौ मीटर की दूरी पर,
दो इमली के पेड़ हुआ करते थे,
दिन में बच्चे, और रात में तो बड़े भी,
वहां से गुजरने में डरते थे,

लेकिन, उस उम्र में, वो भी एक मजा था,
कालिया के साथ, कोई एक, वह जाता था,
डर तो लगता था, मगर, मजा बड़ा आता था,
कालिया पेड़ पर चढ़, इमलियां तोड़ लाता था,

कभी कभी, हम पकड़े भी जाते थे,
क्लास में ही, कान पकड़ कर,
कोने में खड़े किए जाते थे,

अब सब बड़े हो गए,
रास्ते सबके जुदा हो गए,
पर ना भूले उस माहौल को,
एक दूसरे की याद सबको है।।

देव

13 may 2020

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