बस, अब और ना बदलना

तुम पहले तो कभी ऐसे नहीं दिखे,
जो अब दिख रहे हो,
सोचा ही ना था, कभी तुम्हे प्यार करूंगी,
हां, कोई वक़्त था जब लगता था,
थोड़े खुसंट से होगे, और कपड़े,
पहनने का सलीका भी कहा था,
धीरे धीरे वक़्त निकलता रहा,
सोच बदलती रही, तुम्हे और जाना,
बड़े सीधे से थे तुम, बड़े सच्चे से,
सच कहूं, वो तो अब भी हो,
मगर अब बहुत बदल गए हो,
प्यार तो होना लाजमी है,
मगर अब पा नहीं सकती,
तो बस, चाहती हूं, दिल से,
चाहती हूं, एक दोस्त की तरह,
बस, यू ही रहना, ये शायद
तुम्हारा सबसे प्यारा वर्जन है,
बस, इसे ना बदलना,
बस, सच्चे ही रहना,
बस, अब और ना बदलना।

बड़ी खुश हू, तुम्हे प्यार ही गया,
उम्र के इस पड़ाव में,
तुम्हे कोई अपना सा मिल गया,
जानती हूं तुम्हे, तुम चाहते हो,,
यकीं करो, आज नहीं तो,
कल उसे अहसास होगा,
हां, यकीं है, उसे भी प्यार होगा,
तहे दिल से, बस,
उस यू ही चाहते रहना
तुम बिल्कुल ना बदलना,

तुम्हारी कविताओं से खींचा है,
मैंने चित्र उसका, सच में,
हंसी नहीं है कोई दूजा उससा,
उसकी हर अदा को तो,
लिख डाला तुमने,
हर लब्ज़ में अपने,
उस उतारा तुमने,
यूं ही उसके खातिर,
लिखते रहना,
बस, अब और ना बदलना।।

देव

26 जून 2020

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