मेरे इश्क़ में यही, खामियाजा है,खुद से कम, तुझसे ज्यादा है।।

मेरे इश्क़ में यही, खामियाजा है,
खुद से कम, तुझसे ज्यादा है।।

तेरे इश्क़ में, यही खामियाजा है,
मुझ से कम, खुद से ज्यादा है।।

रह गया, मैं कहीं पीछे,
तू पल में, आगे चल पड़ी,
मंजिले मेरी तू बनी,
तेरी राहें, मुझसे ना मिली,
वक़्त कम, रास्ता आधा है।

खुद से कम, तुझसे ज्यादा है…

इश्क़ है, तो कह दो तुम,
यूं नहीं, चुप रहो तुम,
दिल की बात है,
जरा सुन भी को तुम,
सांस कम, जहां आधा है,

खुद से कम, तुझसे ज्यादा है…

देव

One thought on “मेरे इश्क़ में यही, खामियाजा है,खुद से कम, तुझसे ज्यादा है।।

Leave a Reply