बुझने से पहले शमां के हालात पर तरस आया,
क्यूं बिलख बिलख कर, उसको रोना आया,
जिसे अपनी गर्माहट, पर गुमान था कभी,
जिसने परवानों को, पल में जला दिया कभी,
अब जाना, अब वो इतनी तन्हा क्यूं है,
उसके हाथो में, इश्क की लकीर, नदारद क्यूं है।।
देव
02 August 2020