एक बार फिर से, जरा मुस्कुरा दो

एक बार फिर से, जरा मुस्कुरा दो,
जिंदगी कब से कह रही है,

माना, गम बहुत है जमाने में,
और तेरी झोली में भी,
खुशियां कम है, मगर
कब तक रहोगे यूं उदास,
एक बार फिर से, जरा मुस्कुरा दो,
जिंदगी कब से कह रही है,

तन्हा तुम ही नहीं,
तन्हा हम भी है,
जमाने की भीड़ में,
अकेले तुम भी चल रहे हो,
अकेले हम भी बढ़ रहे है,
मगर, बांट कर खुशियां,
मायूस चेहरों को,
एक बार फिर से, जरा मुस्कुरा दो,
जिंदगी कब से कह रही है।

यूं ना देखो, मुड़कर
बार बार, जो गुज़र गया,
वो गुज़र गया, और
दिन काफी है अभी बाकी,
माना, उम्र गुजरी है काफी,
मगर, खूबसूरती अब भी है बाकी,
एक बार फिर से,
सुंदरता अपनी दिखा दो,

एक बार फिर से, जरा मुस्कुरा दो,
जिंदगी कब से कह रही है।।

देव

30/08/2020, 3:18 pm

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