अंदाज जुदा है!

जाहिर करने का उनका, अंदाज जुदा है,
नमाज का नाम है, और रुख मेरा किया है।।

कैसे छिपाएंगी, वो मोहब्बत हमारी,
उनकी हंसी में भी, नाम मेरा छुपा है।

बरदाश्त है नहीं, उन्हें कोई इल्जाम लगाए,
खुद ही जाहिर, जग में प्यार अपना किया है।

देव

23/10/2020, 10:14 pm

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